मनुष्य जन्म का प्रथम उद्देश्य है ,सतभक्ति कर मोक्ष प्राप्त करना ।मोक्ष की बात आने पर अज्ञानियों ने भक्ति को इतना कठिन बता दिया कि भक्ति करना बहुत मुश्किल है। लेकिन शास्त्र प्रमाणित करते हैं कि आज जीवन में कोई आसान काम है तो वह है सत भक्ति करना ।सत भक्ति के लिए गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में बताया है कि तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर उस तत्व ज्ञान को समझ जिसे तेरा मोक्ष हो सकता है। गीता में बताया है कि तत्व ज्ञान को प्राप्त करने के बाद कोई ज्ञान शेष रह नहीं जाता।
मानव जीवन में सत भक्ति नहीं की तो 84 लाख योनियों में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है ।सत भक्ति पूर्ण संत ही बताते हैं।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में बताया है कि शास्त्र विरुद्ध साधना करने से कोई लाभ नहीं होता है और आज विश्व में सतगुरु रामपाल जी महाराज जी ही हैं जो शास्त्र अनुकूल भक्ति बता रहे हैं।
जो रोग योग से ठीक नहीं होते वे सत्यभक्ति से ठीक हो जाते हैं।
⭕इस शरीर को कि तना भी स्वस्थ रखा जाए आखिर में मृत्यु तो होगी ही।
लेकिन यदि सही भक्ति की जाए तो ऐसे लोक में चले जायेंगे जहां कभी मृत्यु नहीं होगी।*
जीवन का कल्याण केवल सत भक्ति से ही होगा।
*योग करने से सिर्फ शारीरिक सुख मिलता है लेकिन पूर्ण परमात्मा तो सिर्फ भक्ति योग से ही मिल सकता है।*
हमें सबसे बड़ा रोग जन्म मृत्यु का है और ये केवल भक्ति योग से ही मिट सकता है।
भक्ति योग से आप वहां चले जाओगे जहां किसी प्रकार का कोई रोग ही नहीं है। जहां किसी वस्तु का अभाव नहीं है।
भक्ति योग सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि भक्ति योग से ही हमारा जन्म मरण का रोग कट सकता है अर्थात पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
लेकिन
पूरन सतगुरु की शरण मे आना होगा
आज इस संसार मे केवल संत रामपालजी के आलावा इस पृथ्वी पर कोई संत या सतगुरु नही है जो जनम मरण का रोग मिटा सके...
*अधिक जानकारी के लिए रोजाना शाम ७-३० बजे साधना चैनल के सत्संग देखे।*
plz.visit-
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