#GodKabir_PrakatDiwas_2020
#पूर्णसंतरामपालजी
कबीर साहेब प्रकट दिवस
KishandasJune 5, 2020 at 12:22 PM
कबीर परमात्मा ही विश्व को भक्ति दृढ़ाने के लिए सतलोक से सशरीर प्रकट होते हैं सतगुरु रूप बनाकर
गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप।
मोमन के डेरा लिया, कहै कबीरा बाप।।यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान । शीश दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जानकबीर बाणी-
कह कबीर चित चेतहुं, शब्दगरीबदास
काल डरे करतार से जय जय जगदीश ।
जोरा जोरी झाड़ती रज पग डारे शीश ।। कौर निरूवार।
श्रीरामहि कर्ता कहत हैं, भुली पर्यो संसार ।
जिन राम कृष्ण व निरंजन कियो,सो तो करता न्यार।
अंधा ज्ञान न बूझई, कहैत कबीर विचार।
सत गुरू देव जी की जय हो
सत साहेव जीजिन हमको निज नाम दिया सोई सतगुरु हमार दादू दूसरा कोई नहीं वह कबीर सिरजनहारफाई सुरत मुल्क की वेश ऐ ठगवाड़ा ठगी देश ।
खरा सियाणा भोता भार धानक रूप रहा करतार ।।कोई है रे परले पार का जो भेद कहे झंकार का वार ही गोरख वारही दत्त वारही ध्रुव प्रह्लाद भगत वारही गोपी भरतरी चंद वारही शेष कला गोविंद
काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी का जल लहरों के द्वारा नीची पटरी के ऊपर से उछल कर एक सरोवर में आता था। इसलिए उस सरोवर का नाम लहरतारा पड़ा। उस तालाब में बड़े-2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में बताया है कि शास्त्र्त्र विरुद्ध साधना करने से कोई लाभ नहीं होता है। आज विश्व में सतगुरु रामपाल जीी ही शास्त्र् अनुकूल भक्ति् बताा रहे।
अतः सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि सद्गुरु रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर सद्भक्ति करके पूर्ण मोक्ष प्राप्त करें।
देखिए साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30
No comments:
Post a Comment