पात्र या चरित्र-चित्रण उपन्यास को मुंशी प्रेमचन्द ने मानव चरित्र का चित्र माना है 87 इससे ... 'पात्र और उनके चरित्र चित्रण के बिना उसका उपन्यास 'उपन्यास' नहीं कहला सकता और चाहे कुछ भी ... परन्तु इससे वास्तव में समस्या का समाधान नहीं हो सकता । क्योंकि ऐसी स्थिति में यह कहना कठिन हो जायेगा कि कौन सा कार्य समाज के अनुकूल है और कौन सा समाज के प्रतिकूल है ।
मानव जन्म मिलने से मानव नहीं कहला सकता ।मानवता के गुण होने पर ही मानव कहला सकता है। शास्त्र अनुकूल भक्ति करने पर ही मानव कहला सकता है। आज विश्व में कोई भी गुरु शास्त्र अनुकूल भक्ति नहीं बता रहे हैं ।केवल सतगुरु रामपाल जी महाराज जी ही शास्त्र अनुकूल भक्ति बता रहे हैं। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में बताया कि शास्त्र विरुद्ध साधना करने से कोई लाभ नहीं होता है। अतः सभी से नम्र निवेदन है कि सतगुरु रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करके अपना कल्याण करवाएं हैं ।शास्त्र अनुकूल भक्ति के लिए देखिए साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30
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